Identify the timing of selling mutual fund unit is also important says Bhus | म्यूचुअल फंड यूनिट बेचने का समय पहचानना भी जरूरी: भूषण केदार

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Identify the timing of selling mutual fund unit is also important says Bhus | म्यूचुअल फंड यूनिट बेचने का समय पहचानना भी जरूरी: भूषण केदार

Identify the timing of selling mutual fund unit is also important says Bhus | म्यूचुअल फंड यूनिट बेचने का समय पहचानना भी जरूरी: भूषण केदार
2018-11-30 14:22:22

Dainik Bhaskar

Nov 29, 2018, 08:25 AM IST

मुंबई. म्यूचुअल फंड स्कीम खरीदते समय लोग इसके तमाम पहलुओं पर ध्यान देते हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह देखते हैं कि इससे कब बाहर निकला जाए। यह सच है कि इक्विटी फंड में निवेश का फायदा लंबे समय में मिलता है, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं कि आप पैसे लगाने के बाद भूल जाएं और जब निवेश की अवधि खत्म होने को आए तब उस पर ध्यान दें। एक और बात। लोग इक्विटी मार्केट में थोड़े समय के लिए आई गिरावट या बढ़त के समय निवेश करने या पैसे निकालने का फैसला करते हैं। इससे उन्हें लांग टर्म का फायदा नहीं मिल पाता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि फंड से निकलने का सही समय कौन सा होता है। 

 

फंड लगातार अंडरपरफॉर्म कर रहा हो: होल्डिंग पर हमेशा नजर रखनी चाहिए ताकि अंडरपरफॉर्मर को पहचाना जा सके। अगर बेंचमार्क रिटर्न की तुलना में कोई स्कीम लगातार अंडरपरफॉर्म कर रही है तो उसकी वजह देखनी चाहिए। अगर स्कीम कमजोर लगती है तो उससे तत्काल निकल कर बेहतर परफॉर्मेंस वाली स्कीम में पैसे लगाएं। ध्यान देने वाली बात यह है कि एक या दो तिमाही तक स्कीम की अंडरपरफार्मेंस के आधार पर फैसला ना करें। लांग टर्म के आधार पर निर्णय लें। 

 

स्कीम में बदलाव: सेबी ने हाल ही म्यूचुअल फंड कैटेगरी का रिक्लासिफिकेशन किया है। इसके बाद म्यूचुअल फंडों ने भी स्कीमों में बदलाव किए हैं। उदाहरण के लिए जो डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड था वह पूरी तरह लार्ज कैप इक्विटी फंड हो चुका है। संभव है कि इसमें रिटर्न भी पहले की तुलना में कम मिले। कुछ स्मॉल और मिड कैप फंड पूरी तरह स्मॉल कैप फंड बन गए हैं। इनमें जोखिम पहले की तुलना में अधिक होगा। अगर यह आपकी जोखिम लेने की क्षमता से मेल नहीं खाता तो उसे स्कीम से निकल जाना चाहिए। 

 

निवेशक के रिस्क प्रोफाइल में बदलाव: कई बार परिस्थितियां बदलने से आपकी जोखिम लेने की क्षमता कम हो जाती है। तब आपको निवेश की योजना में भी बदलाव करना पड़ेगा। उदाहरण के लिए जब आप ज्यादा जोखिम ले सकते हैं तो आपके पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा अधिक होगा। लेकिन अगर आप ज्यादा जोखिम नहीं ले सकते तो इक्विटी फंड का कुछ निवेश निकालकर डेट फंड में लगाना पड़ेगा। 

 

पोर्टफोलियो की रिबैलेंसिंग: मान लीजिए आपके पोर्टफोलियो में डेट और इक्विटी 40:60 के अनुपात में था। 2017 में बाजार में तेजी की वजह से पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा बढ़कर 80% हो गया। ऐसे में आपको पोर्टफोलियो का मूल्यांकन करना चाहिए और इक्विटी फंड से कुछ होल्डिंग कम करके डेट फंड में लगाना चाहिए। इससे आप का जोखिम कम रहेगा। 

 

लक्ष्य हासिल करने के बाद: फाइनेंशियल प्लानिंग का मकसद तय समय में आर्थिक लक्ष्य को हासिल करना होता है। आपने समय से पहले लक्ष्य हासिल कर लिया तो निवेश को सुरक्षित करना बेहतर होगा। जैसे, आपने कार खरीदने के मकसद से 3 साल के लिए हाइब्रिड फंड में एसआईपी शुरू किया। लेकिन बेहतर रिटर्न की वजह से आपको 2 साल में ही कार खरीदने लायक पैसे मिल गए। आपको तत्काल उस फंड से निकल कर कम जोखिम वाले प्रोडक्ट में पैसा लगाना चाहिए। 

 

भूषण केदार, डायरेक्टर, कैपिटल मार्केट्स फंड रिसर्च, क्रिसिल

 

(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।) 

 

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Identify the timing of selling mutual fund unit is also important says Bhus | म्यूचुअल फंड यूनिट बेचने का समय पहचानना भी जरूरी: भूषण केदार
2018-11-30 14:22:22

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