Gujarat riots: SC defers hearing on Zakia Jafri’s plea till Nov 2 | मोदी के खिलाफ याचिका में तीस्ता का नाम शामिल होने का एसआईटी ने किया विरोध, सुनवाई टली

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Gujarat riots: SC defers hearing on Zakia Jafri’s plea till Nov 2 | मोदी के खिलाफ याचिका में तीस्ता का नाम शामिल होने का एसआईटी ने किया विरोध, सुनवाई टली

Gujarat riots: SC defers hearing on Zakia Jafri’s plea till Nov 2 | मोदी के खिलाफ याचिका में तीस्ता का नाम शामिल होने का एसआईटी ने किया विरोध, सुनवाई टली
2018-11-28 11:36:29

2002 में गुलबर्ग सोसायटी में भड़के दंगों में कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोगों की हत्या हुई थी
एसआईटी ने फरवरी 2012 को क्लोजर रिपोर्ट दायर कर मोदी को क्लीन चिट दी थी
दिवंगत सांसद की पत्नी जकिया जाफरी ने अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

Dainik BhaskarNov 19, 2018, 02:58 PM IST

नई दिल्ली. 2002 के गुजरात दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) से क्लीन चिट मिलने के खिलाफ दायर जाकिया जाफरी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 26 नवंबर को सुनवाई करेगा। जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच ने कहा कि इस मामले पर सुनवाई के लिए थोड़ा और वक्त चाहिए।

 

एसआईटी के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा- ये याचिका विचार योग्य नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को इस मामले में दूसरी याचिकाकर्ता नहीं बनाया जा सकता है। इस पर बेंच ने कहा- आपकी बात पर हम इस मामले की सुनवाई से पहले विचार करेंगे। 

 

साबरमती ट्रेन के कोच में आगजनी के बाद भड़के थे दंगे

27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती ट्रेन के कोच में आग लगा दी गई थी। इसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी। मारे गए ज्यादातर लोग अयोध्या से लौट रहे कारसेवक थे। इस घटना के बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे। इनमें करीब 1000 लोगों की जान चली गई थी।

गुलबर्ग सोसायटी में 69 लोगों की हत्या हुई

गोधराकांड के अगले दिन 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में दंगाइयों ने कांग्रेस सांसद जाफरी समेत 69 लोगों की हत्या कर दी थी। घटना के बाद सोसायटी से 39 लोगों के शव मिले थे। बाकी 30 लोगों के शव नहीं मिलने पर 7 साल बाद उन्हें मृत मान लिया गया था। गुलबर्ग सोसायटी में 28 बंगले और 10 अपार्टमेंट हैं। गुजरात दंगों से जो इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे, गुलबर्ग सोसायटी उनमें से एक थी। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी ने गुलबर्ग सोसायटी केस की दोबारा जांच की थी। एसआइटी ने इस मामले में 66 लोगों को गिरफ्तार किया था। 

दंगों के वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री थे मोदी  

जकिया जाफरी का आरोप है कि दंगा भड़कने के दौरान उनके पति वरिष्ठ नेताओं और पुलिस अफसरों को फोन करते रहे, लेकिन गुलबर्ग साेसायटी तक मदद नहीं पहुंची और दंगाइयों को रोका नहीं जा सका। दंगों के वक्त मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। एसआईटी ने 8 फरवरी 2012 को क्लोजर रिपोर्ट दायर की। इसमें नरेंद्र मोदी और अन्य अफसरों को क्लीन चिट दी गई। इसके खिलाफ जकिया जाफरी की याचिका को दिसंबर 2013 में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट और 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने ठुकरा दिया था।

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