British Currency not Have Picture Of Noor Inayat Khan | नोटों पर नहीं छपेगी भारतीय मूल की ब्रिटिश जासूस प्रिंसेस नूर इनायत की तस्वीर

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British Currency not Have Picture Of Noor Inayat Khan | नोटों पर नहीं छपेगी भारतीय मूल की ब्रिटिश जासूस प्रिंसेस नूर इनायत की तस्वीर

  • नूर इनायत खान की तस्वीर ब्रिटेन में 50 पाउंड के नोटों पर छापी जानी थी
  • बैंक ऑफ इंग्लैंड के मुताबिक नोट पर किसी साइंटिस्ट की फोटो छपेगी

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2018, 12:38 PM IST

लंदन.  भारतीय मूल की राजकुमारी और द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटेन की जासूस रहीं नूर इनायत खान की तस्वीर ब्रिटेन में 50 पाउंड के नोटों पर छापी जानी थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। बैंक ऑफ इंग्लैंड के मुताबिक नोट पर किसी साइंटिस्ट की फोटो छपेगी, लेकिन लोग अब नूर इनायत खान के बारे में जानना चाहते हैं।

 

वह भारतीय राजकुमारी थीं, जिसके पिता सूफी प्रचारक थे। वह लघु कथा लेखक और संगीतकार थीं जो वीणा और पियानो बजाती थीं। वह बिल्कुल वहीं थीं जिसकी 1943 में ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी को बेहद जरूरत थी। नूर का जन्म 1 जनवरी, 1914 को मॉस्को में हुआ था। यहां उनके पिता इनायत खान संगीत कार्यक्रम के लिए पहुंचे थे। वे मशहूर संगीतकार और सूफी दार्शनिक थे। उन्होंने अमेरिकी महिला ओरा रे बेकर से शादी की थी जिन्होंने अपना नाम अमिना शारदा बेगम रख लिया था। 

फ्रेंच आने की वजह से खुफिया एजेंसी में जगह मिली : जब 1939 में युद्ध घोषित किया गया तो नूर 25 साल की थीं। उनका परिवार युद्ध के दौरान स्वयंसेवक के तौर पर इंग्लैंड गया। 1940 में नूर वायुसेना में महिला सहायक के तौर पर शामिल हुईं और रेडियो ऑपरेटर का प्रशिक्षण लिया। फ्रेंच बोलने की क्षमता को देखते हुए जल्द ही उन्हें गुप्तचर संगठन स्पेशल ऑपरेशंस एक्जीक्यूटिव में शामिल कर पेरिस जाने के लिए चुना गया। 

कोडनेम था मेडलेन : नूर की जीवनी लिखने वाली श्राबनी बसु के मुताबिक नूर ने हथियारों का डर दूर करने के लिए कड़ी मेहनत की और कोड पकड़ने की क्षमता में जबरदस्त सुधार किया। लेकिन उनके साथियों को अभी भी संदेह था। उन्होंने कहा कि वह बहुत छोटी और अनुभवहीन हैं। कोड भूल जाती हैं, चाय से पहले कप में दूध डालने के तरीके से ब्रिटिश पृष्ठभूमि पता चल जाती है। जून 1943 में उन्हें जीन-मैरी रेनियर नाम देकर बच्चों की नर्स के तौर पर फ्रांस भेजा गया। कोडनेम था- मेडलेन। लेकिन 10 दिन के भीतर उनके नेटवर्क के सभी एजेंट पकड़ा गए।

 

ब्रिटेन लौटने से मना कर दिया :  एजेंट के पकड़े जाने के बाद नूर को ब्रिटेन लौटने को कहा गया, लेकिन उसने इनकार कर दिया। उसने कहा कि वो फिर से नेटवर्क तैयार करेगी। वो अकेले छह लोगों का काम कर रही थीं। उनकी वजह से पायलट्स को दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर बम गिराने में मदद मिली। 

अक्टूबर 1943 में वो पकड़ ली गईं। उन्हें काफी यातनाएं दी गईं। 12 सितंबर, 1944 को उन्हें दचौ शिविर भेजा गया। अगले दिन नूर और तीन महिलाओं को मार दिया गया। तब वो 30 साल की थीं। उनकी बहादुरी के लिए ब्रिटेन ने उन्हें जॉर्ज क्रॉस और फ्रांस ने गोल्ड स्टार के साथ क्रॉइक्स डी ग्वेरे से सम्मानित किया।

Images are for reference only.Images gathered automatic from google.All rights on the images are with their original owners.

2018-12-06 02:36:06

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